नई दिल्ली : उत्तराखंड में LUCC घोटाले से प्रभावित दिल्ली पहुंची महिलाओं के दल ने मंगलवार 17 मार्च को दिल्ली के जंतरमंतर में धरना प्रदर्शन कर अपनी मांगों का ज्ञापन महामहिम राष्ट्रपति तक पहुंचाया। इस प्रदर्शन में उत्तराखंड के पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत और पूर्व राज्यमंत्री धीरेंद्र प्रताप ने शिरकत कर महिलाओं को अपना समर्थन दिया।
इस घोटाले के खिलाफ प्रभावित महिलाएं पिछले डेढ़ साल से सड़कों पर आंदोलन चला रही हैं। जब उनकी कहीं सुनवाई नहीं हुई तो वे सरस्वती देवी जी के नेतृत्व में श्रीनगर गढ़वाल से 400 किलोमीटर की पैदल यात्रा कर महामहिम राष्ट्रपति से मिलने के लिए दिल्ली पहुंची हैं। आजकल महिलाओं का यह दल दिल्ली की सड़कों पर अपने लिए न्याय की मांग कर रहा है।
धरने में शामिल महिलाओं ने बताया कि वे एलयूसीसी घोटाले को लेकर पिछले डेढ़ वर्ष से लगातार आंदोलन कर रही हैं लेकिन अब तक उनकी मांगों पर कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई । जनता की गाढी़ मेहनत की कमाई को सरकार से रजिस्टर्ड एक संस्था ने जिस तरह हड़प लिया, उससे हजारों लोगों के सामने भारी आर्थिक संकट खड़ा हो गया है। लगभग 1000 करोड़ रुपए से अधिक के इस घोटाले में सरकार की लापरवाही और जनता की जायज मांग को न सुनना बताता है कि सरकार किस तरह से इस घोटाले में लिप्त अपराधियों को बचाना चाहती है। इस घोटाले की सबसे बड़ी शिकार पहाड़ की सीधी-सादी महिलाएं हुई हैं।
उत्तराखंड के पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत ने भी जंतर-मंतर पहुंचकर आंदोलनकारी महिलाओं का समर्थन किया। उन्होंने कहा कि पीड़ित लोगों को न्याय मिलना चाहिए और इस पूरे प्रकरण की निष्पक्ष जांच होनी चाहिए ताकि जिन लोगों की जमा-पूंजी फंसी है उन्हें राहत मिल सके।
इस अवसर पर सभी वक्ताओं ने सरकार से मांग की कि घोटाले की उच्चस्तरीय जांच कर दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाए तथा पीड़ितों की धनराशि वापस दिलाने के लिए ठोस कदम उठाए जाएं।
धरने में वरिष्ठ कांग्रेस नेता हरिपाल रावत, आंदोलनकारी अनिल कुमार पंत, वरिष्ठ कांग्रेस नेता धीरेन्द्र प्रताप, प्रताप तलवाल, प्रदीप नौडियाल, कुलदीप रावत, भूपेंद्र रावत, कुशल जीना और राकेश बिंजोला सहित कई सामाजिक और राजनीतिक कार्यकर्ता प्रमुख रूप से उपस्थित रहे।

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