नई दिल्ली : उत्तराखंड के सुप्रसिद्ध लोकगायक दीवान सिंह कनवाल के आकस्मिक निधन पर आज उत्तराखंड सदन, दिल्ली में एक श्रद्धांजलि सभा का आयोजन किया गया। श्रद्धांजलि सभा का आयोजन महाकौथिग की टीम तथा कुमाऊनी भाषा, साहित्य एवं सांस्कृतिक समिति के द्वारा किया गया।
सभा में उत्तराखंड की संस्कृति, भाषा, साहित्य और सामाजिक क्षेत्र से जुड़े अनेक लोगों ने उपस्थित होकर दिवंगत लोकगायक को भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित की तथा उनके योगदान को याद किया। वक्ताओं ने कहा कि दीवान सिंह कनवाल ने अपने मधुर स्वरों और लोकगीतों के माध्यम से उत्तराखंड की लोकसंस्कृति को नई पहचान दी। उनके गीतों में पहाड़ की मिट्टी की सुगंध, लोकजीवन की संवेदना और संस्कृति का गहरा प्रभाव झलकता था।
कुमाऊनी भाषा, साहित्य एवं सांस्कृतिक समिति के राष्ट्रीय अध्यक्ष सुरेंद्र हलसी ने बताया कि कनवाल जी के निधन पर उत्तराखंड ने अपना एक महान लोकगायक खो दिया । उनका लोकगायन हमेशा हमें याद रहेगा । उन्होंने उनके साथ अपनी स्मृतियों को भी सांझा किया ।
वरिष्ठ संगीतकार राजेंद्र चौहान ने उनसे जुड़ी सभी स्मृतियों को साँझा करते समय काफ़ी भावुक हो गए । उन्होंने बताया कि मैने उनकी बहुत सारी कैसेट में संगीत दिया, इसलिए उनको व्यक्तिगत तौर पर उनके जाने का काफ़ी दुख है ।
इस अवसर पर संगीतकार राजेन्द्र चौहान, सामाजिक कार्यकर्ता सुरेंद्र हालसी, लोक गायिका कल्पना चौहान, मुख्य मंत्री के मीडिया कॉर्डिनेटर मदन मोहन सती, वरिष्ठ साहित्यकार पूरन चंद्र कांडपाल, रमेश घिंडियाल, बहादुर सिंह बिष्ट, वरिष्ठ रंगकर्मी के.एन. पांडे, भोपाल सिंह रावत, जगदीश तिवारी , वरिष्ठ पत्रकार चारू तिवारी, दीप सिलोड़ी, हरीश असवाल, नीरज बवाड़ी, उदय ममगाईं, भगवत मनराल, मनोज आर्य, सुबोध थपलियाल, भुवन रावत, रेणु उनियाल, शीला पंत, निर्मल नेगी, महेश गंधर्व सहित विभिन्न सामाजिक एवं सांस्कृतिक संगठनों से जुड़े अनेक लोग उपस्थित रहे।
सभा के अंत में सभी उपस्थित जनों ने दो मिनट का मौन रखकर दिवंगत आत्मा की शांति के लिए प्रार्थना की और उनके द्वारा उत्तराखंड की लोक संस्कृति के लिए किए गए योगदान को सदैव स्मरण रखने का संकल्प लिया।

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