नई दिल्ली : वरिष्ठ साहित्यकारों/भाषाविदों के तत्वाधान में पंचकुइया रोड स्थित गढ़वाल भवन में रविवार को आयोजित साहित्यिक संगोष्ठी में इसकी परिकल्पना, उद्देश्य और सार्थकता पर विशेष वक्तव्य के साथ ही दो साहित्यकारों की पुस्तकों का विमोचन और काव्य पाठ किया गया। साहित्यिक संगोष्ठी के द्वारा इस अवसर पर श्री रमेश चंद जोशी आई ए एस, ए एस (से.नि.) को साहित्य सम्मान से नवाजा गया।
गोष्ठी का शुभारंभ गणेश आराधना और फूलदेही त्यौहार की शुभकामनायों के साथ हुआ। इसके बाद सुशील बुड़ाकोटी शैलांचली और संदीप गढ़वाली घनशाला द्वारा संगोष्ठी की परिकल्पना पर विचार रखे गए।
गिरधारी सिंह रावत की पुस्तक का विमोचन
वरिष्ठ रंगकर्मी, साहित्यकार और गीतकार गिरधारी सिंह रावत ने अपने द्वारा लिखे गए गीतों का संकलन कर पुस्तक का रूप दिया। उनकी गीतिका संग्रह गीत जु लिख्यां छन का उपस्थित वरिष्ठ साहित्यकारों ने विमोचन किया। श्री पार्थसारथी थपलियाल और प्रो. हरेंद्र सिंह असवाल और श्री रोशन लाल हिंद कवी ने उनकी पुस्तक पर समीक्षात्मक चर्चा की।
इसके बाद साहित्यकारों की नौडी-पौड़ी की पजल यात्रा की जगमोहन सिंह रावत जगमोरा ने विस्तृत जानकारी दी। उन्होंने कहा कि पजल यात्रा के दौरान कई क्षेत्रों में भ्रमण किया लेकिन नौडी को विशेष ही पाया। उन्होंने सभी को वहां की यात्रा करने का अनुरोध भी किया।
इस बीच जौनसार क्षेत्र में पहाड़ी उत्पादों पर विशेष कार्य कर रही कुछ महिलाओं को सम्मानित किया गया।
सुरेंद्र सिंह रावत लाटा की पुस्तक का विमोचन
एक कारखाना कामगार के भीतर भी कवी जन्मता है ये सिद्ध कर दिखाया है सुरेंद्र सिंह रावत लाटा ने। उन्होंने समाज के विभिन्न स्वरूपों को अपनी कविताओं में उजागर किया है। उन्होंने इस काव्य संग्रह में सभी से एक प्रश्न किया है जिसे आप उनकी किताब पढ़ कर ही समझ सकते हैं। उन्होंने पुस्तक का टाइटल भी एक प्रश्न के रूप में ही रखा है पता नहीं क्यों, जिसका कि कल विमोचन हुआ। उनके मित्र सुनील थपलियाल घंजीर ने उनकी पुस्तक और रावत जी का संक्षिप्त परिचय दिया। उन्होंने कहा रावत जी का लेखन साहित्यिक अभिजात्यपने से बाहर है या यूं कहें कि खुरदरा है, लाउड है, अक्खड़ है बेसुध है और कभी कभी भावुकता के रंग में डूबा हुआ है। सुरेंद्र जी ने बेसक अपना उपनाम लाटा रखा हो लेकिन वास्तव में उनका लेखन फर्राटा है।
सुरेंद्र सिंह रावत लाटा ने जताया आभार
सुरेंद्र सिंह रावत लाटा ने कहा कि मेरी 6वीं पुस्तक 'पता नहीं क्यों ? ' के विमोचन अवसर पर मुझे वरिष्ठ जनों का आशीर्वाद प्राप्त हुआ। मार्गदर्शन के लिए श्रीमान जगमोरा जी व श्रीमान सुशील बुड़ाकोटी जी, श्रीमान सुनील थपलियाल (घंजीर) जी, श्रीमान कैलाश बहुगुणा (उत्तरांचल फोटो स्टूडियो फरीदाबाद) व रावत डिजिटल के श्रीमान अनूप रावत जी का एवं उपस्थित सभी महानुभावों का हृदयतल से हार्दिक आभार । आप लोगों का आशीर्वाद सदा ऐसे ही मुझ पर बना रहे।
अंत में हुआ काव्य पाठ
साहित्य के लिए समर्पण इसे ही कहा जाता हैं कि समय काफी व्यतीत होने के बावजूद वरिष्ठ साहित्यकारों के साथ ही अनेक युवा साहित्यकारों ने वहां मौजूद रहकर अपनी अपनी काव्य शैली में पाठ कर समां बाँध दिया। काव्यपाठ करने वाले कवियों में सर्वश्री जब्बर सिंह, चंदन सिंह प्रेमी, दीनदयाल बंदुनी, सुशील बुड़ाकोटी शैलांचली, भगवती प्रसाद जुयाल, दिनेश ध्यानी, जयपाल सिंह रावत, पृथ्वी सिंह केदारखंडी, रोशन लाल हिंद कवी, बीरेंद्र जुयाल उपिरि, संदीप गढ़वाली घनशाला, ओ पी पोखरियाल, द्वारिका प्रसाद चमोली, शशि बडोला, कुसुम चौहान, निर्मला नेगी, दीवान सिंह नेगी रिंगूड, कन्हैया प्रसाद पसबोला इत्यादि।

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