कर्णप्रयाग : उत्तराखंड के चमोली जिले में 12 वर्ष बाद आयोजित होने वाली एशिया की सबसे लंबी ऐतिहासिक व धार्मिक पैदल यात्रा श्री नंदादेवी राजजात 2026 जिसे हिमालयी महाकुंभ भी कहा जाता है, को स्थगित कर दिया गया है। अब इसका आयोजन अगले वर्ष 2027 में होगा। इसकी जानकारी नंदा देवी राजजात यात्रा समिति से जुड़े पदाधिकारियों ने दी। बताया जा रहा है कि इस वर्ष ज्येष्ठ माह (मई-जून के मध्य) में मलमास (अधिमास) के चलते नंदा देवी राजजात के आयोजन की तिथियां काफी आगे चली गई हैं, जिसके कारण यात्रा को स्थगित किया गया है।
रविवार 18 जनवरी 2026 को कर्णप्रयाग में नंदा देवी राजजात समिति के अध्यक्ष डा. राकेश कुंवर की अध्यक्षता में एक बैठक हुई। बैठक में जिलाधिकारी चमोली के पत्र और नंदा देवी राजजात मार्ग अध्ययन दल की रिपोर्ट पर चर्चा हुई। सितंबर में उच्च हिमालयी क्षेत्रों में चुनौतियां बढ़ जाती हैं जिससे आयोजन जोखिमभरा हो सकता है, लिहाजा 2026 में राजजात का आयोजन संभव नहीं हो पाएगा। ऐसे में राजजात का आयोजन 2027 में कराना सर्वथा उपयुक्त होगा।
बैठक के बाद नंदा देवी राजजात यात्रा समिति के अध्यक्ष डा. राकेश कुंवर एवं महासचिव भुवन नौटियाल ने बताया ने कि हिमालयी क्षेत्र में जरुरी कार्य समय पर पूरे नहीं हो पाए हैं। इसी कारण समिति ने राजजात यात्रा को स्थगित करने का निर्णय लिया है। अब यह ऐतिहासिक और धार्मिक यात्रा अगले वर्ष 2027 में आयोजित की जाएगी। अब 23 जनवरी को वसंत पंचमी के मौके पर गढ़वाल राजवंशी कांसुवा गांव के राजकुंवर नंदा देवी मंदिर नौटी में राजजात को लेकर मनौती मांगेंगे और पंचांग गणना के अनुसार आगे के कार्यक्रमों की घोषणा करेंगे।
उन्होंने स्पष्ट किया कि अभी 2026 में राजजात के मुहूर्त की अनुष्ठानिक घोषणा नहीं हुई थी और यात्रा सिर्फ प्रस्तावित थी।
बैठक में कुछ प्रस्ताव हुए पारित
- राजजात को व्यवस्थित, भव्य एवं सुरक्षित बनाने के लिए गठित हो राजजात प्राधिकरण।
- छंतोलियों, डोली पडावों, यात्रा समिति प्रतिनिधियों, कार्यदायी संस्थाओं व जनप्रतिनिधियों की भागीदारी सुनिश्चित करने को तहसील स्तर पर उपजिलाधिकारी व जिलास्तर पर जिलाधिकारी की अध्यक्षता में हो यात्रा समितियों का गठन।
- राजजात के लिए बजट में स्वीकृत हो 5,000 करोड़ का आर्थिक पैकेज, राजजात मद का हो सृजन, ताकि हर वर्ष बजट में लोकजात के लिए मिल सके उचित राशि।
- राजजात का मानचित्र घोषित हो।
- देवराड़ा व कुरुड़ को पर्यटन मानचित्र में मिले जगह।
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