दिल्ली में पंचकुईयां मार्ग के समीप अंध महाविद्यालय के परिसर में उप्रेती निवास है वहीँ आज से लगभग तीस साल पहले मनमोहन उप्रेती जी से मुलाकात हुई। उनके पिताजी स्वर्गीय बालकिशन उप्रेती जी का बुक बॉन्डिंग का काम था। मन्नू भाई भी वहीँ पिताजी के साथ काम में हाथ बंटाते थे। एक बार अपनी एक किताब को बॉन्डिंग करवाने के लिए मैंने मन्नू भाई को दिया। तब उन्होंने पूछा कि क्या तुम लिखते हो? फिर वहीँ से उनके साथ बात होने लगी। जब उनको पता चला कि मैं लिखता हूँ व कवि भी हूँ, तो सबसे पहले मन्नू भाई ने कहा कि सुरेश नौटियाल को जानते हो? मैंने कहा हाँ जनता हूँ। तो उन्होंने कहा कि नौटियाल जी मेरे दोस्त हैं, हम दोनों ने हाई हिलर्स में एक साथ कई नाटकों में काम किया है। उन्होंने कई नाम गिनाये जो अपने ज़माने के जाने पहचाने नाम थे। जैसे राजेंद्र धस्माना, मित्रानंद कुकरेती, सुशीला रावत और खुशहाल सिंह बिष्ट आदि। तब लगा कि ये सच में रंगमंच से परिचित हैं। फिर मन्नू भाई से अक्सर जब भी मिलना होता था तो वे अपने मित्र सुरेश नौटियाल जी के बारे जरूर पूछते थे।
ज़िन्दगी की आपाधापी में एक कलाकार और उसका हुनर भले ही कुछ समय के लिए दब गया था लेकिन समय के साथ उनके अंदर का कलाकार ज़िंदा रहा। हाल के वर्षों में मन्नू भाई लगातार सामाजिक सरोकारों से जुड़े रहे। कहीं भी कोई आयोजन खासकर नाटक होता तो वे जरूर पहुँच जाते थे। और यही कारण रहा की विगत वर्ष 2025 में मनमोहन उप्रेती जी ने रंगमंच में वापसी की और पिछले वर्ष दि हाई हिलर्स संस्था द्वारा डॉ सतीश कलेश्वरी द्वारा लिखित मधु मंडाण नाटक का मंचन आईटीओ के एलटीजी सभागार में मंचन किया गया था जिसमें मनमोहन उप्रेती जी ने बहुत ही उम्दा अभिनय करके सबको आश्चर्य चकित कर दिया कि एक कलाकार के अंदर जो कलाकार होता है वह हमेशा ज़िंदा रहता है। उसको जब मौका मिलता है तो वह अपनी प्रतिभा जरूर दिखाता है। लेकिन मन्नू भाई को कुछ दिनों से समस्या हो रही थी। उनके अनुज बरिष्ठ समाजसेवी और दिल्ली एनसीआर में उत्तराखण्ड के सरोकारों के लिए समर्पित उत्तराखण्ड राज्य आंदोलनकारी बृजमोहन उप्रेती द्वारा मन्नू भाई को गंगाराम अस्पताल में भर्ती करवाया गया था। लेकिन नियति को कुछ और ही मंजूर था। मन्नू भाई 16 जनवरी, 2026 की रात को सबको अलविदा कहकर अनंत यात्रा पर चले गए। उनके परिवार में पत्नी व बच्चों के अतिरिक्त दोनों भाइयों और बहनों का भरपूरा परिवार है।
गढ़वाली रंगमंच के इस बरिष्ठ कलाकार को विनम्र श्रद्धांजलि। भगवान् इस दिवंगत आत्मा को अपने श्री चरणों में स्थान दें और परिजनों को इस दुःख को सहन करने की शक्ति दें।
दिनेश ध्यानी

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