करंट पोस्ट

8/recent/ticker-posts

नई दिल्ली : बहुभाषी मासिक साहित्यिक संगोष्ठी में "कृपाल सिंह शीला" को मिला साहित्य सम्मान साथ ही दर्शन सिंह रावत की पुस्तक "घार बूण" पर हुई चर्चा

नई दिल्ली : बहुभाषी मासिक साहित्यिक संगोष्ठी में "कृपाल सिंह शीला" को मिला साहित्य सम्मान साथ ही दर्शन सिंह रावत की पुस्तक "घार बूण" हुई चर्चा


साहित्यिक संगोष्ठी : महाशिवरात्रि के पावन शुभ अवसर पर रविवार को  गढ़वाल भवन, दिल्ली में मासिक साहित्यिक संगोष्ठी सम्पन्न हुई, जिसमें सुदूर भिकियासैंण,  (अल्मोड़ा) से आमंत्रित शिक्षक एवं नवाचार के अभिप्रेरक कृपाल सिंह 'शीला' को तीसरा साहित्य सम्मान प्रदान किया गया। इससे पूर्व दिसंबर में कमल रावत को उनके सुप्रसिद्व 'देवलगढ़' उपन्यास के लिए और जनवरी में डॉ० कुसुम भट्ट को उनके 'मौरु मंडाण' मुखौटा नाट्य संस्कृति में उत्कृष्ट कार्य करने हेतु सम्मानित किया गया है। 

श्रीलगुळि (मनीप्लांट) के सान्निध्य में जगमोरा के पजल गीत-खोली का गणेशा और राजेंद्र कुकरेती के गीत 'जय उत्तराखंड' के साथ आयोजन का शुभारंभ हुआ। तीन सत्रों की संगोष्ठी के प्रथम सत्र में जनवरी माह के ऐतिहासिक 'बहुभाषा काव्य कौथिक' की समीक्षा की गई। दूसरे सत्र में दर्शन सिंह रावत जी के गढ़वाली कहानी संग्रह घार बूण पर सार्थक चर्चा हुई। 

मुख्य वक्ताओं के रूप में जयपाल सिंह रावत, चंदन प्रेमी, दीनदयाल बन्दूणी 'दीन', जबर सिंह कैंतुरा, जगमोहन सिंह रावत 'जगमोरा', दिनेश ध्यानी, निर्मला नेगी, गोविंद राम पोखरियाल 'साथी', द्वारिका प्रसाद चमोली, संदीप घनशाला 'गढ़वाली' ने अपनी सारगर्भित समीक्षा की। दर्शन सिंह रावत ने कहा कि उन्होंने लगभग 65 से अधिक साहित्यिकारों के बीच किसी साहित्यकार की किताब पर इस तरह की गहन समीक्षात्मक चर्चा करते हुए साहित्य प्रेमियों को पहली बार देखा है। और उन्हें आगे भी लिखने के लिए प्रेरणा मिली है।

संगोष्ठी के तीसरे सत्र में कृपाल सिंह शीला को अंगवस्त्र,पत्रम् पुष्पम् एवं प्रशस्तिपत्र प्रदान कर सम्मानित किया गया। परिचय गढ़वाली भाषा में डॉ सतीश कालेश्वरी और कुमाउनी भाषा में चारु तिवारी ने दिया। 

साहित्य सम्मान के बारे में जानकारी देते हुए जगमोरा ने कहा कि सुशील बुड़ाकोटी 'शैलांचली' द्वारा गढ़वाली भाषा में लिखे गए सम्मान का कुमाउनी में अनुवाद डॉ हेमा जोशी 'हिमाद्रि' ने किया, साज-सज्जा रावत डिजिटल के अनूप रावत ने की है। ठुले देवता का ठुला प्रशस्ति पत्र। उनका व्यक्तित्व ऐसा है कि उन्हें अगर दो वर्ष के बाद सम्मान दिया जाना होता, तो वह ताम्रपत्र से कम नहीं होता। 

अंतिम सत्र काव्य पाठ का था जिसमें आशा रौतेला मेहरा, चंदा फुलारा, अनूप सिंह रावत, प्रदीप रावत 'खुदेड़', रमेश चंद्र सोनी, संतोष कुमार ध्यानी, दयाल सिंह नेगी, उमेश बन्दूणी, सुरेन्द्र सिंह रावत, मंगतराम धस्माना, ललिता राणा, अंजली भंडारी, त्रिलोक सिंह कड़ाकोटी, नीलू सती, गिरधारी सिंह रावत, श्याम सुंदर कड़ाकोटी, बीर सिंह राणा, डॉ सतीश कालेश्वरी, डॉ राम निवास 'इंडिया' ने शानदार रचनाओं से सबका मन मोह लिया। मंच संचालन सुशील बुड़ाकोटी 'शैलांचली' और बृजमोहन शर्मा वेदवाल ने किया।

संगोष्ठी में सर्वश्री रोशन लाल 'हिंद कवि', दीप नारायण सिंह भंडारी, बहादुर सिंह बिष्ट, शशिकांत बडोला, कुंवर सिंह बिष्ट, सतीश रावत, पयाश पोखड़ा, डॉ बिहारी लाल जलन्धरी, हरीश गैरोला, सुनील थपलियाल 'घंजीर', खजान दत्त शर्मा, गरिमा राणा, सुल्तान सिंह तोमर, टेकचंद, जगदीश, रोशनी रावत, सुरेन्द्र सिंह, राजेन्द्र सिंह रावत, सागर पहाड़ी, युगराज सिंह रावत, ओम ध्यानी, इंद्रजीत सिंह रावत, प्रताप थलवाल, रविंद्र गुडियाल, चंद्र सिंह रावत 'स्वतंत्र', दिनेश चंद्र जोशी, सोम प्रकाश, सुरेन्द्र कुमार जुयाल, कैलाश कुकरेती इत्यादि साहित्य प्रेमियों की गरिमामय उपस्थिति रही।

एक टिप्पणी भेजें

0 टिप्पणियाँ