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पार्वती के मायके में शिव जी की होली का खास महत्व है : प्रोफेसर वेदवाल

पार्वती के मायके में शिव जी की होली का खास महत्व है : प्रोफेसर वेदवाल

गाजियाबाद : बुरांस साहित्य एवं कला केंद्र द्वारा मोहन नगर, यूपीडीएसआईडीसी की साइट टू के प्राणा योग सभागार में 2 मार्च को उत्तराखंड की होली का आयोजन किया गया। इस आयोजन में प्रवासी उत्तराखंड के लोगों के साथ-साथ बड़ी तादाद में यूपी, बिहार, पंजाब और अन्य राज्यों के लोगों ने भी होली गीतों का जमकर आनंद लिया।

होली गीतों के आयोजन की शुरुआत उत्तराखंडी परंपरा के अनुसार भगवान शिव और पार्वती को तिलक लगाकर हुई। जिसके बाद प्राणा योगा की संस्थापिका योग शिक्षिका इंदू देवरानी ने सभी लोक कलाकारों और अतिथियों का चंदन तिलक लगाकर अभिनंदन किया।

होली गीत के होलियारों में लोकगायक सतेंद्र फरंडियाल, लोकगायक कुंज बिहारी मुंडेपी 'कलजुगी', लोकगायक वीरेन्द्र सिंह रावत, युवा गायिका आस्था नौटियाल ने उत्तराखंड की होली के मनोभाव गीत प्रस्तुत किए। संगीतकार गोपाल सिंह नेगी और युवा तबलावादक निर्सग नेगी की संगीतमय होली धुनों पर उपस्थित जनसमुदाय ने जमकर नृत्य कर पहाड़ी होली का आनंद उठाया। 

बुरांस साहित्य एवं कला केंद्र के अध्यक्ष प्रोफेसर प्रदीप कुमार वेदवाल के संचालन में सजी होली की यह महफिल, फूलों से मथुरा छाई रही, जल कैसे भरूं यमुना गहरी, हरि-हरि पीपल पात, कृष्णा जी छोटे सुदामा बड़े जैसे होली गीतों से यादगार बन गई।  

उत्तराखंड की कला और संस्कृति के मर्मज्ञ वरिष्ठ साहित्यकार एवं शिक्षाविद प्रोफेसर प्रदीप कुमार वेदवाल ने बताया कि उत्तराखंड में पहले भगवान शिव को रंग लगाया जाता है और फिर  होली की शुरूआत होती है। देवभूमि उत्तराखंड पार्वती का मायका है इसलिए कुमांऊ की बैठकी होली में भगवान शिव जी पर आधारित होली गीतों को खास उत्साह, उमंग और श्रद्धापूर्वक गाये जाने की परंपरा है। यह पद बहुत लोकप्रिय है कि "पार्वती से रंग खेलने गये शम्भू ससुराल में डमरू बजता कभी दादरा, कभी कहरवा ताल में"।

होली के आयोजन के संयोजक अतुल देवरानी ने प्रवास में पहाड़ के होली गीतों की महफिल में भोजपुरी के लोकगीतों के गायन को सांस्कृतिक विरासत के प्रचार-प्रसार के लिए सुखद बताया।

बुरांस साहित्य एवं कला केंद्र द्वारा आयोजित होली की इस संगीतमय महफिल में वरिष्ठ पत्रकार डाक्टर रोशन गौड़, कार्पोरेट जगत से अनिल गौड़, समाजसेवी विनोद कबटियाल, सुप्रसिद्ध ब्लागर पूजा गुसांई, सोहन सजवाण, अनिता भट्ट, सुभाष देवरानी, प्रीति खण्डूडी, शशि सजवाण,अजय सिंह, पल्लवी किशोर, शैलजा श्रीवास्तव, प्रतीक श्रीवास्तव, नीरज रावत, दिनेश बिष्ट आदि मौजूद रहे।

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