नई दिल्ली : उत्तराखंड की अस्मिता और स्वाभिमान की रक्षा के लिए पूर्व IAS अधिकारी विनोद प्रसाद रतूड़ी ने अब आर-पार के धर्मयुद्ध का ऐलान कर दिया है। आगामी 8 मार्च 2026 से राजधानी देहरादून की सड़कों पर वे अनिश्चितकालीन क्रमिक अनशन के माध्यम से सोई हुई सरकार को जगाने का काम करेंगे।
दिल्ली के प्रेस क्लब में रतूड़ी जी ने व्यवस्था पर कड़ा प्रहार करते हुए कहा कि 25 साल बीत जाने के बाद भी प्रदेश को अपनी स्थाई राजधानी न मिलना और पहाड़ की अस्मिता के साथ लगातार खिलवाड़ होना, उन 42 शहीदों की शहादत का सबसे बड़ा अपमान है जिन्होंने अपने प्राणों की आहुति देकर इस राज्य को सींचा था। अपने 25 वर्षों के सेवाकाल में अटूट ईमानदारी की कीमत 48 से अधिक तबादलों के रूप में चुकाने वाले और शासन में रहते हुए गैरसैण राजधानी के लिए आवाज़ उठाने वाले इस निर्भीक अधिकारी ने दो-टूक शब्दों में चेतावनी दी है कि मैं शासन में रहते हुए भी किसी के आगे नहीं दबा, और अब जनहित की इस लड़ाई में दबने या झुकने का सवाल ही पैदा नहीं होता।
उन्होंने घोषणा की है कि यह अनशन "प्राण से प्राण तक" चलेगा, जिसमें वे मुख्यमंत्री से सीधे सवाल करेंगे और जल्द ही भ्रष्ट तंत्र व वादाखिलाफी करने वाले नेताओं का घेराव कर उन्हें जनता की अदालत में खड़ा करेंगे। रतूड़ी जी ने स्पष्ट किया कि वे इस गंभीर मुद्दे को लेकर बहुत जल्द उच्च न्यायालय का दरवाजा भी खटखटाएंगे ताकि व्यवस्था की जवाबदेही तय की जा सके। पहाड़ के स्वाभिमान को ललकारते हुए उन्होंने अपना दमदार संवाद जारी किया- "हवाओं ने बहुत कोशिश की मेरे हौसलों का चिराग बुझाने की, लेकिन उन्हें नहीं पता कि मैं तबादलों की भट्टी में तपकर कुंदन बना हूँ" अब या तो न्याय होगा या फिर क्रांति! यह लड़ाई अब केवल एक व्यक्ति की नहीं, बल्कि हर उस उत्तराखंडी की है जो अपनी जड़ों और शहीदों के बलिदान के प्रति जवाबदेह है।

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