नई दिल्ली : रविवार को दिल्ली के संसद भवन के निकट जंतर मंतर पर भू कानून संयुक संघर्ष समिति, दिल्ली एनसीआर के तत्वाधान में अंकिता भंडारी हत्याकांड की CBI जांच और VIP की गिरफ्तारी की मांग को लेकर सांकेतिक धरना दिया गया। जिसमें सामाजिक संगठनों और दिल्ली एनसीआर के सैकड़ों लोगों ने अपना विरोध जताया। साथ ही प्रधानमंत्री को ज्ञापन भी दिया।
माननीय प्रधानमंत्री जी
भारत सरकार
साउथ ब्लॉक, नई दिल्ली
नॉर्थ ब्लॉक, नई दिल्ली
विषय: अंकिता भंडारी बलात्कार एवं हत्या प्रकरण की जाँच CBI को हस्तांतरित किए जाने तथा संबंधित तात्कालिक कार्यवाही हेतु माँग
महोदय,
अत्यंत पीड़ा, आक्रोश और एक जिम्मेदार नागरिक के कर्तव्यबोध के साथ हम आपका ध्यान उत्तराखंड की एक निर्दोष युवती, स्वर्गीय अंकिता भंडारी के जघन्य बलात्कार एवं हत्या के मामले की ओर आकर्षित करना चाहते हैं, जिसने पूरे देश की अंतरात्मा को झकझोर कर रख दिया है।
अंकिता भंडारी उत्तराखंड स्थित एक निजी रिसॉर्ट में रिसेप्शनिस्ट के रूप में कार्यरत थीं, जो एक प्रभावशाली राजनीतिक नेता के पुत्र के स्वामित्व में था। विभिन्न माध्यमों से सामने आए तथ्यों के अनुसार, उन पर अत्यंत प्रभावशाली व्यक्तियों को प्रसन्न करने के लिए अपनी गरिमा से समझौता करने का दबाव बनाया गया। जब उन्होंने इसका विरोध किया, तो उनके साथ शारीरिक उत्पीड़न किया गया और अंततः उनकी निर्मम हत्या कर दी गई।
यद्यपि स्थानीय न्यायालय द्वारा मुख्य अभियुक्तों को आजीवन कारावास का दंड दिया गया है, तथापि इस प्रकरण से जुड़े कई गंभीर प्रश्न आज भी अनुत्तरित हैं—विशेषकर तथाकथित “VIP” व्यक्तियों की पहचान, व्यापक साजिश की भूमिका तथा राजनीतिक प्रभाव की आशंकाएँ।
हाल ही में श्रीमती उर्मिला सनावर द्वारा किए गए खुलासों ने इन आशंकाओं को और अधिक बल दिया है। उनके द्वारा सार्वजनिक किए गए कथित कॉल रिकॉर्डिंग्स में हरिद्वार के एक पूर्व विधायक द्वारा कुछ वरिष्ठ राजनीतिक पदाधिकारियों के नाम लिए जाने की बात सामने आई है, जिनके बारे में दावा किया गया है कि वे उस रात रिसॉर्ट में उपस्थित थे जब अंकिता भंडारी की हत्या हुई, और उन्हें किसी एक के साथ जबरन संबंध बनाने के लिए विवश किया जा रहा था। यदि ये आरोप सत्य सिद्ध होते हैं, तो यह संविधान, कानून के शासन और समान न्याय की मूल भावना पर गंभीर आघात होगा।
प्रारंभ से ही उत्तराखंड के नागरिकों और देशवासियों को यह आशंका रही है कि राज्य सरकार के अधीन की गई जाँच पूरी तरह निष्पक्ष और प्रभाव-मुक्त नहीं हो सकती, विशेषकर तब जब अत्यंत प्रभावशाली और सत्तासीन व्यक्तियों के नाम इस प्रकरण से जोड़े जा रहे हों।
न्याय में देरी या न्याय की अपूर्णता, न्याय से वंचित किए जाने के समान है। अंकिता भंडारी की आत्मा की शांति और देश की करोड़ों महिलाओं का न्याय व्यवस्था पर विश्वास तभी बहाल हो सकता है जब कानून से ऊपर कोई भी न हो।
अतः हम विनम्रतापूर्वक, किंतु दृढ़ता के साथ, निम्नलिखित माँगें आपके समक्ष रखते हैं—
1. इस पूरे प्रकरण की जाँच, जिसमें साजिश एवं प्रभावशाली व्यक्तियों की संभावित संलिप्तता भी शामिल हो, तत्काल प्रभाव से केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (CBI) को सौंपी जाए, ताकि एक स्वतंत्र, निष्पक्ष एवं विश्वसनीय जाँच सुनिश्चित हो सके।
2. श्रीमती उर्मिला सनावर द्वारा जारी कॉल रिकॉर्डिंग्स की प्रामाणिकता की जाँच हेतु एक स्वतंत्र एवं उच्चस्तरीय फॉरेंसिक परीक्षण तत्काल कराया जाए, जिससे सत्य निर्विवाद रूप से सामने आ सके।
3. रिकॉर्डिंग्स में जिन प्रभावशाली व्यक्तियों के नाम सामने आए हैं, उन्हें जाँच पूर्ण होने तक उनके सभी आधिकारिक एवं संगठनात्मक दायित्वों से मुक्त किया जाए, ताकि किसी भी प्रकार के दबाव, प्रभाव या हस्तक्षेप की संभावना समाप्त हो सके।
यह स्मरण-पत्र हम किसी राजनीतिक उद्देश्य से नहीं, बल्कि संवैधानिक नैतिकता, मानव गरिमा और “कानून के समक्ष समानता” के सिद्धांत में अटूट विश्वास के साथ प्रस्तुत कर रहे हैं।
हम आशा करते हैं कि इस अत्यंत संवेदनशील एवं गंभीर मामले में शीघ्र और निर्णायक कदम उठाए जाएंगे, जिससे अंकिता भंडारी को पूर्ण, निष्पक्ष और कानूनी न्याय मिल सके।
भवदीय,
भू कानून संयुक संघर्ष समिति, दिल्ली एनसीआर
प्रति -
1. माननीय राष्ट्रपति महोदया, भारत गणराज्य
2. माननीय गृह मंत्री, उत्तरी ब्लॉक, भारत सरकार
3. माननीय मुख्यमंत्री महोदय, उत्तराखंड सरकार

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